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Saturday, 9 March 2019

hello friends     

,how to excel use

m hu aaapka dost or aaj aaapke liye lekr aaya hu ki  hum logo m se bahut se mere dost aise h jinko excel se related problems aaati h to dosto m aaj aapko is post m yehi btane wala hu ki aap excel ka use kaise kr skte h to dosto aap is post ko jarur padhe or pasand aye to like or share jarur kre.



1Getting Started


1.1Overview of Spreadsheets

1.1.1Maintaining Records-रिकॉर्ड के रखरखाव : हेलो मित्रों! लेखा-जोखा (अकाउंट) का इतिहास उतना ही पुराना है, जितनी यह सभ्यता। वास्तव में, को “सबसे पुराना व्यवसाय” माना गया है। कई हज़ार वर्ष पूर्व, आरंभिक सभ्यताओं ने मिट्टी के टोकन और मिट्टी की गोलियों का उपयोग करके अपनी मवेशियों और फसलों का हिसाब रखना आरंभ किया। फिर, उन्होंने अपने अतिरिक्त सामानों को आवश्यक सामग्रियों के लिये अदला-बदली करना आरंभ किया। बाद में, जब उन्होंने व्यापार करना आरम्भ किया, तो उन्होंने कीमतों की अवधारणा को आरंभ किया और मुद्रा-प्रणाली विकसित की। अंततः, कर-प्रणाली के आरंभ के साथ, अर्थ-व्यवस्था पर अपनी पकड़ बनाये रखने के लिये सरकारों को रिकॉर्ड बनाये रखना आवश्यक हो गया।



1.1.2Areas of Application कार्य-क्षेत्र : लगभग सभी को कुछ प्रकार के रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता होती है। अध्यापकों को समय-सारणी, ग्रेड और उपस्थति-सूची का प्रबंधन करना होता है। व्यापार में वेतन-विवरण, बजट, प्रोजेक्ट और अन्य वित्तीय डेटा का प्रबंधन करना होता है। लेखाकार (अकाउन्टेंट) और वित्तीय विश्लेषकों (फ़ाइनेंशियल एनालिस्ट) को भी लेखा-जोखा के डेटा का रखरखाव करना होता है। यहाँ तक कि एक गृहणी को परिवार के बजट का प्रबंधन करना होता है। अतः, डेटा का रखरखाव और गणनाएँ करना कुछ ऐसा है, जिससे हम बच नहीं सकते, चाहे कितनी भी कोशिश कर लें!



1.1.3Benefits of Tabular Dataतालिका-बद्ध डेटा के लाभ : ‘रो’ एवं कॉलम की तालिका के रूप में व्यवस्थित डेटा को समझना और उनका विश्लेषण हमेशा ही आसान होता है। इसके कुछ लाभ इस प्रकार हैं - 

• आप बड़ी मात्रा में डेटा का प्रबंधन कर सकते हैं 
• आपके सामने डेटा का त्वरित और साफ़ स्वरूप नज़र आता है 
• ऐसे डेटा की आसानी से पुनः संरचना की जा सकती है, जिससे परिवर्तनों और कुछ जोड़ने की सुविधा मिलती है 
• विभिन्न प्रोग्रामों के बीच इस डेटा का अलाइनमेंट (संरेखन) बना रहता है 
• डेटा को आसानी से पुनः व्यवस्थित किया जा सकता और खोज करना आसान हो जाता है 
• डेटा में प्रयुक्त पैटर्न आसानी से पहचाने जा सकते हैं 
• खोये हुए डेटा का पाता लगाया जा सकता है


1.1.4Manual Spreadsheets : एक भौतिक स्प्रेडशीट कॉलम और ‘रो’ की कागज़ की एक बड़ी शीट होती है। यह कागज़ के एक टुकड़े पर संबंधित डेटा को फैलता या प्रदर्शित करता है, जिससे आपको निर्णय करते समय इसका परीक्षण करने में सहायता मिलती है। कम मात्रा में उपलब्ध डेटा का रखरखाव हाथ से करना तो ठीक है। लेकिन तब क्या होता है, जब रखे जाने वाले रिकॉर्ड की संख्या बढ़ जाती है? हाथ से काम करने वालों की संख्या भी बढ़ जाती है, डेटा के रखरखाव और विश्लेषण में लगने वाला समय भी बढ़ जाता है, और ज़ाहिर तौर पर त्रुटियों की संभावना भी बढ़ जाती हैं! पुराने समय में, यदि आपसे गलती हो जाती, तो आपको गलती वाले स्थान से लेकर पूरे डेटा को मिटाना, सफ़ेद करना या स्प्रेडशीट को फिर से लिखना पड़ता। इसी प्रकार, सभी प्रतियों को ठीक करना पड़ता। कागज़ के भौतिक रिकॉर्ड के रखरखाव को स्टोर करने के लिये आवश्यक स्थान की मात्रा को भी भूलें नहीं! साथ ही, यह चिंता भी बनी रहती थी कि कागज़ पर दीमक या कोई अन्य कीट लग जाने के कारण कागज़ ख़राब हो सकता था!



1.1.5Coping with Demands - माँग का मुकाबला : लेनदेन की रिकॉर्डिंग और उनके रखरखाव की कला कई वर्षों में अधिक प्रगतिशील बनी है। हाल के वर्षों में, आधुनिक तकनीकी ने लेखाकारों की कार्य-प्रणाली को बदल दिया है। बड़ी-बड़ी कंपनियों में, जहाँ बड़ी मात्रा में डेटा प्रोसेस करने कि आवश्यकता होती थी, उस मात्रा का मुकाबला करने के लिये कंप्यूटर को अपना लिया गया है। भौतिक स्प्रेडशीट की सीमाओं को इस तरह से जीत लिया गया है। आज के व्यापार की आवश्यकता है, कि केवल एक बटन दबाने से अकाउंट की सूचना और प्रदर्शन का मूल्यांकन उपलब्ध हो सके। मार्केट में इस कार्य के लिये अनेक पहले से तैयार सॉफ़्टवेयर पैकेज उपलब्ध हैं।



1.1.6Electronic Spreadsheets : इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट की दुनिया में स्वागत है! वर्कशीट के नाम से भी प्रचलित, इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट एक कम्प्यूटर प्रोग्राम होती है, जिसके ज़रिये यूज़र ‘रो’ एवं कॉलम वाली एक तालिका में संख्याएँ एवं टेक्स्ट एंटर कर सकता है। वह तालिका की संरचना का उपयोग करके उन संख्याओं का रखरखाव और क्रियान्वयन  कर सकता है। इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट के ज़रिये यूज़र को बड़ी मात्रा में उपलब्ध टेक्स्ट और संख्या-संबंधी डेटा को आसानी से ऐक्सेस करने योग्य फॉर्मेट में इनपुट करने की सुविधा प्राप्त होती है। वर्कशीट ने पारंपरिक हाथ से लिखे लेजर का स्थान ले लिया है और हाथ से किये जाने वाले संख्यात्मक विश्लेषण और गणनाओं को अब बहुत ही कम समय में किया जा सकता है। कुछ ही क्षणों में कितिनी ही प्रतियाँ बनायी जा सकती हैं।



1.1.7Early Spreadsheets-आरंभिक स्प्रेडशीट : विज़ीलैक और लोटस 1-2-3- दो आरंभिक स्प्रेडशीट प्रोग्राम थे। आज विभिन्न माहौल में स्प्रेडशीट लाभप्रद होते हैं क्योंकि इनमें आसानी से रिपोर्ट्स बनायी जा सकती हैं और इनमें केवल वित्तीय रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि अनेक प्रकार की सूचनाओं को तालिका-बद्ध करने में इनका उपयोग किया जा सकता है।

1.1.8Features of Electronic Spreadsheets : इलेक्ट्रॉनिक स्प्रेडशीट का उपयोग करके बस माउस के क्लिक के द्वारा  इसमें उपलब्ध दर्जनों फ़ंक्शन का उपयोग किया जा सकता है। आवश्यकतानुसार, यहाँ तक कि वर्तमान स्प्रेडशीट में भी ‘रो’ एवं कॉलम को इन्ज़र्ट किये जा सकते हैं। फ़ॉन्ट कलर और साइज़, ग्रिडलाइन के प्रदर्शन और स्वतः गोलाकार हो जाने के फ़ीचर के कारण आप किसी क्रियाशील वर्कशीट को प्रेज़ेन्टेशन के लिये उपयुक्त डॉक्यूमेंट में बदल सकते हैं। एक बार डेटा डाल देने पर, स्प्रेडशीट प्रोग्राम इसे एक ग्राफ़ या चार्ट में बदल सकता है, और जब आप डेटा को बदलते हैं तो ग्राफ़ या चार्ट भी तदनुसार बदल जाते हैं। एक भी एंट्री में किया गया कोई भी संशोधन शेष गणना को स्वतः ही बदल देता है। हाथ से बनायी जाने वाली महंगी कैशबुक और अकाउंटिंग के सॉफ़्टवेयर पैकेज की तुलना में स्प्रेडशीट प्रोग्राम्स का उपयोग अत्यधिक किफ़ायती सिद्ध होता है।



1.1.9Popular Spreadsheet Applications : वर्तमान स्प्रेडशीट एप्लीकेशन में आसानी से उपयोग किये जा सकने वाले ग्राफ़िकल इंटरफ़ेस होते हैं जिनमें पुल-डाउन मेन्यू होते हैं, जिनको माउस के द्वारा पॉइंट और क्लिक किया जा सकता है। माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल और ओपनऑफ़िस .ओआरजी कैल्क कुछ लोकप्रिय स्प्रेडशीट प्रोग्राम हैं। ऑनलाइन स्प्रेडशीट एक वेब पर आधारित एप्लीकेशन के द्वारा बनाया गया स्प्रेडशीट डॉक्यूमेंट होता है, जिसके ज़रिये अनेक व्यक्ति उसका संपादन और आदान-प्रदान कर सकते हैं। कुछ उपयोगी ऑनलाइन स्प्रेडशीट हैं, गूगल डॉक, एडिटग्रिड, सोशलकैल्क, ऑफ़िस  वेब ऐप, आदि। हम माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल 2010 का उपयोग करना सीखेंगे, जो एक सम्पूर्ण स्प्रेडशीट एप्लीकेशन है। यह माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस सिस्टम का एक भाग है और साथ ही एक स्टैंडअलोन उत्पाद भी है। एक बार एक्सेल सीख लेने पर, आप प्रत्येक प्रकार की सूचना को व्यवस्थित करना सीख लेंगे। तो, एक कुशल, व्यवस्थित व्यक्ति के रूप में बदलने के लिये तैयार हो जाएँ, जो कभी कुछ नहीं भूलता!



1.1.10Features of Excel 2010 : माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल 2010 में प्रचुर मात्रा में उपयोगी टूल होते हैं। आप तेज़ी से अजेंडा, प्लानर, इन्वेंटरी-सूची, रसीद आदि डिज़ाइन करने के लिये पहले से तैयार विविध प्रकार के टेम्पलेट्स से चयन कर सकते हैं। एक्सेल का उपयोग करने के सबसे बड़े लाभ में से एक यह है कि इसमें यूज़र को ‘व्हाट-इफ़’ विकल्प प्राप्त होता है। यूज़र विविध गणनाओं को स्वयम् किये बिना, उनके संभावित परिणाम ज्ञात कर सकता है।

स्प्रेडशीट को पासवर्ड से सुरक्षित करके आप अपनी संवेदनशील सूचनाओं को सुरक्षित तरीके से स्टोर कर सकते हैं। पाईवोट टेबल और स्पार्कलाइन जैसे फ़ीचर के ज़रिये आप कुछ ही बटनों का उपयोग करके डेटा के संक्षिप्त स्वरूप को विविध प्रकार से देख सकते हैं। अनेक यूज़र कंप्यूटर नेटवर्क का उपयोग करके एक ही डॉक्यूमेंट पर एक साथ काम कर सकते हैं। यूज़र इमेल का उपयोग करके अथवा नेटवर्क पर फ़ाइलें अपलोड करके भी अपने काम का आदान-प्रदान कर सकते हैं।


1.1.10Starting Excel 2010 : माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल में, किसी एक फ़ाइल या डॉक्यूमेंट को “वर्कबुक” कहते हैं। इसमें एक या अधिक “वर्कशीट” का संग्रह होता है। एक्सेल आरंभ करने के लिये, आपको पहले यह एप्लीकेशन खोलनी होगी। “स्टार्ट” बटन को दबाएँ और “ऑल प्रोग्राम्स → माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस → माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस एक्सेल 2010” सेलेक्ट करें। जब आप एक्सेल को आरंभ करते हैं, तो आपके सामने एक नयी वर्कबुक आती है, जिसका डिफ़ॉल्ट नाम बुक 1 होता है, जिसमें तीन खाली वर्कशीट शीट1, शीट2 और शीट3 होती हैं। पहली नज़र में एक्सेल की स्क्रीन अत्यंत जटिल नज़र आ सकती है। लेकिन, जब आप एक्सेल का उपयोग करना आरंभ कर देते हैं, तो आप इसकी अत्यंत प्रभावशाली क्षमताओं की प्रशंसा करेंगे।


1.2The User Interface : 

1.2.1The :User Interface  यूज़र इंटरफ़ेस वह तरीका है जिसमें आप अपने कंप्यूटर के साथ संचार करते हैं। माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस का यूज़र इंटरफ़ेस अपने सभी घटकों में अत्यधिक समानता रखता है। एक्सेल 2010 के उत्कृष्ट फ़ीचर के उपयोग करने के पूर्व बेहतर होगा कि आप एक्सेल 2010 के स्क्रीन संबंधी तत्वों से अपना परिचय कराएं। तो अब हम आरंभ करते हैं!



1.2.2Quick Access Toolbar : आप जानते हैं कि एक्सेल का उपयोग करने का लक्ष्य है आपके समय और मेहनत की बचत करना। क्विक ऐक्सेस टूलबार यही करने में आपकी सहायता करता है। इस छोटे से टूलबार में वे बटन होते हैं, जिनसे वर्कबुक को सेव करने, आपकी पिछली क्रिया को अनडू करने, अथवा पिछली क्रिया को दोहराने जैसी सामान्य क्रियाएँ होती हैं।  

टायटिल बार – हम सभी के नाम होते हैं, इसी प्रकार हमारी वर्कशीट के भी नाम होते हैं! एक्सेल डॉक्यूमेंट विंडो के शीर्ष पर स्थित क्षैतिज टायटिल बार में प्रोग्राम और डॉक्यूमेंट के शीर्षक प्रदर्शित होते हैं।


1.2.3Ribbon : टायटिल बार के निचे प्रदर्शित रिबन में एक्सेल के सभी कमांड का सागर समाहित होता है। कृपया डूबने से डरें नहीं! इस सागर में कोमल तरंगे, अर्थात ‘टैब्स’ शामिल होते हैं। इस टैब की संरचना इस प्रकार से की गयी है कि आपके ऊपर इतने सारे कमांड का बोझ डाले बिना आपके सामने केवल वही कमांड प्रदर्शित होंगे जिनकी आवश्यकता आपको किसी विशिष्ट कार्य को पूरा करने के लिये होगी। प्रत्येक टैब के अंदर कुछ समूह (ग्रुप) होते हैं, जिनमें तार्किक रूप से संबंधित कमांडों के बटन होते हैं। इन बटनों से कोई कमांड पूरा किया जाता है, अथवा किसी कमांड का मेन्यू प्रदर्शित होता है।



1.2.4Parts of the Ribbon : अतः, रिबन निम्नलिखित से बने होते हैं - 

(क) कार्य संबंधी टैब।  
(ख) प्रत्येक टैब में स्थित समूह (ग्रुप) जो किसी कार्य को उप-कार्यों में विभाजित करते हैं।  
(ग) प्रत्येक समूह में स्थित कमांड बटन, जो किसी कमांड को लागू करते हैं अथवा कमांड का मेन्यू प्रदर्शित करते हैं। 
कृपया ध्यान दें, कि कभी-कभी आपको एक ही कमांड दो टैब में नज़र आ सकते हैं। ऐसा इसलिए है कि रिबन की संरचना इस प्रकार से की गयी है कि जिन कमांड के उपयोग की आपके लिये संभावना हो वे आपको आसानी से उपलब्ध हों।


1.2.5Contextual Tabs : जब आप अधिकांश माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस एप्लीकेशन को पहली बार लॉन्च करते हैं, तो आपके सामने रिबन का होम टैब नज़र आएगा, जिसमें सर्वाधिक आवश्यक कमांड शामिल होते हैं। जब आप काम करते हैं, तो अतिरिक्त “प्रासंगिक” (“Contextual”) टैब आते-जाते रहते हैं। उदाहरण के लिये, यदि आप किसी तस्वीर पर क्लिक करते हैं, तो “पिक्चर टूल्स” शीर्षक के अंतर्गत एक अतिरिक्त “फ़ॉर्मेट” टैब प्रदर्शित होता है। यदि आप किसी टेक्स्ट बॉक्स पर क्लिक करें तो भी आपको इसी प्रकार के प्रासंगिक टैब नज़र आयेंगे। “प्रासंगिक” (Contextual) टैब में तालिका, तस्वीर, और टेक्स्ट बॉक्स आदि जैसी सामग्रियों को फ़ॉर्मेट करने के नियंत्रक शामिल होते हैं।



1.2.6Dialog Box Launcher : रिबन में किसी कार्य के लिये आवश्यक सर्वाधिक महत्वपूर्ण अथवा प्रमुख कमांड प्रदर्शित होते हैं। डायलॉग बॉक्स लॉन्चर एक ऐसा बटन है जिसपर एक छोटा सा ऐरो स्थित है, जो अनेक समूहों के निचले-दाहिने सिरे पर स्थित होते हैं। इस पर क्लिक करने से, एक डायलॉग बॉक्स खुलता है जो अनेक अन्य विकल्प प्रदान करता है।


1.2.7Worksheet And Active Cell :  वर्कशीट – यह वह स्थान है जिसमें आप काम करेंगे। यह ‘रो’ एवं कॉलम में विभाजित होती है। कॉलम वर्कशीट पर ऊर्ध्व रूप जाते हैं और इनको एक अक्षर से पहचाना जाता है। ‘रो’ क्षैतिज रूप से जाती हैं और एक संख्या से पहचानी जाती हैं। ‘रो’ और कॉलम जिस स्थान पर एक-दूसरे को काटते हैं उसे “सेल” कहते हैं। सेल के चारों ओर जो धुंधली सी लाइनें नज़र आती हैं, उनको “ग्रिडलाइन” कहते हैं। 

ऐक्टिव सेल – ऐक्टिव सेल को उसके चारों ओर स्थित काली आउटलाइन से पहचाना जाता है। डेटा हमेशा ऐक्टिव सेल में एंटर होता है।


1.2.8Rows and Columns : वर्कशीट में प्रचुर मात्रा में डेटा स्टोर करने कि क्षमता बनाने के लिये, एक्सेल 2010 की प्रत्येक वर्कशीट में 1 मिलियन तक ‘रो’ और 16 हज़ार तक कॉलम होते हैं। स्पष्टतः, एक्सेल 2010 की ग्रिड में 1,048,576 ‘रो’ गुणे 16,384 कॉलम होते हैं जिनसे 17 बिलियन से ज़्यादा सेल बनते हैं। कॉलम के नाम A, B, C,… AA, AB, …AZ, BA, BB,… XFD के रूप में होते हैं और ‘रो’ को 1 से संख्या दी गयी होती है।


1.2.9Formula Bar Name Box Sheet Tabs : फ़ॉर्मूला बार – फ़ॉर्मूला बार वर्कशीट के ऊपर स्थित होता है और इसमें ऐक्टिव सेल की सामग्री नज़र आती है। इसका उपयोग डेटा और फ़ॉर्मूला एंटर करने के लिये भी किया जा सकता है। 

नेम बॉक्स – नेम बॉक्स फ़ॉर्मूला बार के बाँयी ओर स्थित होता है और इसमें ऐक्टिव सेल का सेल एड्रेस प्रदर्शित होता है। सेल एड्रेस को सेल रिफ़रेंस या सेल का नाम भी कहते हैं। 
शीट टैब्स – स्क्रीन में सबसे नीचे स्थित शीट टैब में वर्कशीट के नाम प्रदर्शित होते हैं। उनपर क्लिक करने से आप किसी एक्सेल फ़ाइल की विभिन्न वर्कशीट पर जा सकते हैं।


1.2.10Scroll Bars And Status Bar : स्क्रोल बार – स्क्रोल बार वर्कशीट में सबसे नीचे और दाहिने सिरे पर स्थित होता है। प्रत्येक स्क्रोल बार में एक छोटा सा बॉक्स होता है, जिसे स्क्रोल बॉक्स कहते हैं, और दो स्क्रोल ऐरो होते हैं। अतिरिक्त सामग्री को प्रदर्शित करने के लिये स्क्रोल बॉक्स को ड्रैग करें अथवा स्क्रोल बार ऐरो पर क्लिक करें।  

स्टेटस बार – स्क्रीन में सबसे नीचे स्थित यह क्षैतिज बार आपके द्वारा एडिट किये जा रहे डॉक्यूमेंट के विषय में सूचना प्रदर्शित करता है।


1.2.11View Buttons And Zoom Buttons : व्यू बटन – स्टेटस बार के दाहिनी ओर स्थित इन बटन के ज़रिये आप डॉक्यूमेंट के डिस्प्ले मोड को बदल सकते हैं और पेज ब्रेक निर्दिष्ट कर सकते हैं। 

ज़ूम बटन – ये नीचे दाहिने सिरे पर नज़र आते हैं, और इनका उपयोग करके आपके डॉक्यूमेंट को बड़ा या छोटा करके प्रदर्शित किया जा सकता है। आप धनात्मक या ऋणात्मक आयकॉन पर क्लिक करके अथवा स्लाइडर को ड्रैग करके अपेक्षित स्तर प्राप्त कर सकते हैं। इसके ज़रिये आप अपनी इच्छानुसार मात्रा में डेटा देख सकते हैं।


1.2.12Resizing the Formula Bar and Name Box : किसी सेल में बड़ी मात्रा में स्थित टेक्स्ट को आसानी से देखने और एडिट करने के लिये, आप फ़ॉर्मूला बर के आकार को व्यवस्थित कर सकते हैं। अपने माउस के पॉइंटर को सबसे नीचे की ओर ले जाएँ और इसे नीचे की ओर ड्रैग करें जब यह दो-मुँह वाले ऊर्ध्व ऐरो के रूप में बदल जाये।  

लंबे नामों को इसमें समाने के लिये, आप नेम बॉक्स का आकार भी बदल सकते हैं। अपने माउस के पॉइंटर को नेम बॉक्स और फ़ॉर्मूला बार के बीच स्थित सीमा पर ले जाएँ। दाहिनी ओर ड्रैग करें जब पॉइंटर बदलकर दो-मुँह वाले क्षैतिज ऐरो के रूप में बदल जाता है।


1.2.13Help : रिबन के दाहिने सिरे पर स्थित प्रश्नवाचक चिन्ह पर क्लिक करने से आपके सामने ऑफ़िस की जिस एप्लीकेशन का आप उपयोग कर रहे है, उसकी हेल्प विंडो सामने आती है। जब आप अपने माउस को कमांड के अधिकांश बटनों पर ले जाते हैं, तो एक “सुपर-टूलटिप” प्रदर्शित होता है। यह बटन के कार्यों का विस्तृत विवरण देता है। यदि लागू हों, तो इनके समकक्ष कीबोर्ड के शॉर्टकट भी प्रदर्शित होते हैं। इनका उपयोग माउस की क्लिक के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। कमांड से अधिक परिचित हो जाने पर आप उनका उपयोग कर सकते हैं।



1.2.14Galleries and Live Previewing : कुछ टैब में गैलरी बनी होती हैं, जिनमें किसी सामग्री को बदलने के लिये दृश्य विकल्प मौजूद होते हैं। वास्तविक चयन करने के पूर्व मेन्यू या गैलरी के परिणाम देखे जा सकते हैं। किसी विकल्प पर पॉइंटर ले जाकर आप गैलरी में उपलब्ध किसी भी विकल्प को सेलेक्ट करने का परिणाम देख सकते हैं। इसी प्रकार, ड्रॉप-डाउन सूची में उपस्थित किसी विकल्प पर पॉइंटर को ले जाने पर, लाइव प्रीव्यू प्रदर्शित होता है। अब, जबकि आप यूज़र इंटरफ़ेस से परिचित हैं, हम अगले कार्य पर चलते हैं और एक एक्सेल वर्कबुक बनाना आरंभ करते हैं!



1.3Creating a New Workbook : 

1.3.1Creating a Workbook : आप जानते हैं कि जब आप पहली बार एक्सेल को आरम्भ करते हैं, आपको एक खाली वर्कबुक नज़र आती है। जब कोई वर्तमान एक्सेल वर्कबुक खुली हुई हो, तो एक नयी खाली वर्कबुक बनाने के लिये, “फ़ाइल” टैब पर क्लिक करें और बाँए पैन में स्थित “न्यू” को सेलेक्ट करें। केन्द्रीय पैन में, आप विभिन्न टेम्पलेट की श्रेणियाँ देख सकते हैं। टेम्पलेट पहले से डिज़ाइन किये हुए डॉक्यूमेंट होते हैं, जिनको सामान्य कार्यों, जैसे बजट, इन्वेंटरी लिस्ट या प्लानर के लिये बनाया गया होता है।



1.3.2Using Templates : किसी एक मानक टेम्पलेट का उपयोग करके एक नयी वर्कबुक बनाने के लिये, “सैम्पल टेम्पलेट्स” पर क्लिक करें और फिर केन्द्रीय पैन में अपेक्षित टेम्पलेट पर क्लिक करें। दाहिने पैन में “क्रियेट” आयकॉन पर क्लिक करें। बस, हो गया! आपके द्वारा सेलेक्ट किया गए टेम्पलेट के आधार पर एक नयी उपयोग के लिये तैयार वर्कबुक तैयार है, जिसमें आवश्यकतानुसार संशोधन किया जा सकता है। फ़िलहाल, हम आरंभ से एक वर्कबुक बनाना चाहते हैं, अतः हम इसे बंद कर देंगे। शीर्ष पर दाहिनी ओर स्थित “X” आकार के क्लोज़ के आयकॉन पर क्लिक करें। यदि यह पूछते हुए विंडो प्रदर्शित होती है कि क्या वर्कबुक को सेव करना है, तो “डोंट सेव” पर क्लिक करें क्योंकि इस समय हम इस वर्कबुक को सेव करना नहीं चाहते।



1.3.3Downloading Templates : आप माइक्रोसॉफ़्ट की वेबसाइट से विभिन्न प्रकार के टेम्पलेट डाउनलोड कर सकते हैं। “फ़ाइल” टैब पर क्लिक करें और “न्यू” को सेलेक्ट करें। “सर्च ऑफ़िस.कॉम फॉर टेम्पलेट्स” बॉक्स में, जिस टेम्पलेट को आप खोज रहे हैं उसके वर्णन में एक या अधिक शब्द एंटर करें और फिर दाहिनी ओर स्थित ऐरो पर क्लिक करें। प्रदर्शित में से उपयुक्त टेम्पलेट पर क्लिक करें और फिर दाहिने पैन में “डाउनलोड” पर क्लिक करें। टेम्पलेट डाउनलोड हो जायेगी और एक उपयोग के लिये तैयार वर्कबुक प्रदर्शित होगी। वर्कबुक को बिना सेव किया बंद कर दें। यह टेम्पलेट अब आपके कंप्यूटर में सेव हो गयी है और भविष्य में कभी भी इसका उपयोग किया जा सकता है। इसे ऐक्सेस करने के लिये, “फ़ाइल” टैब पर क्लिक करें, “न्यू” को सेलेक्ट करंण और फिर “माई टेम्पलेट्स” पर क्लिक करें। “पर्सनल टेम्पलेट्स” के अंतर्गत डाउनलोड की गयी टेम्पलेट प्रदर्शित होती है। इस पर क्लिक करें और फिर “ओके” पर क्लिक करें। टेम्पलेट पर आधारित एक एक्सेल वर्कबुक प्रदर्शित होती है।



1.3.4Case Study : प्रत्येक शिक्षण संस्था में प्रत्येक विद्यार्थी के द्वारा प्राप्त किये गए अंकों का रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता होती है। हाथों से ऐसे रिकॉर्ड रख पाना निश्चय ही अत्यंत बड़ा और समय लेने वाला कार्य है। हम माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल 2010 का उपयोग करके एक वर्कबुक बनायेंगे, जिसमें कुछ छात्रों के समूह की परीक्षा का रिकॉर्ड शामिल होगा। हम सामान्य गणनाओं, जैसे योग, औसत, आदि के लिये फ़ॉर्मूलों का उपयोग सीखेंगे। साथ ही, हम विभिन्न छात्रों के द्वारा प्राप्त किये गए अंकों कि विविधता को प्रदर्शित करने के लिये चार्ट का उपयोग करेंगे।



1.3.5Creating a Blank Workbook : एक्सेल एप्लीकेशन के चलते समय ही एक नयी खाली वर्कबुक बनाने के लयी, “फ़ैल” टैब को सक्रिय करें और “न्यू - ब्लैंक वर्कबुक - क्रियेट” को सेलेक्ट करें।



1.3.6Moving Between Cells : जब आप एक नयी वर्कबुक बनाते हैं, तो पहली खाली वर्कशीट प्रदर्शित होती है। सबसे शीर्ष की ‘रो’ का पहला सेल सक्रिय है। नेम बॉक्स में, आप सेल एड्रेस देख सकते हैं। यह कॉलम संख्या के द्वारा प्रदर्शित होता है, जिसके बाद ‘रो’ संख्या आती है। यह सेल कॉलम ए और ‘रो’ 1 के प्रतिच्छेदन पर स्थित होता है, अतः इसका एड्रेस A1 के रूप में प्रदर्शित है। किसी सेल में डेटा एंटर करने के लिये, सबसे पहले आपको सेल पर जाना चाहिए। सबसे आसान तरीका है, जिस सेल को आप सक्रिय बनाना चाहते हैं, उसमें माउस से क्लिक करें। आप ऐरो बटनों का उपयोग करके बाँए, दाहिनी ऊपर या नीचे की ओर जा सकते हैं। जब आप एक से दूसरे सेल में जाते हैं, आप नेम बॉक्स में सक्रिय सेल का रिफ़रेंस या एड्रेस देख सकते हैं।

1.3.7Entering Headings : अब आप डेटा एंटर करने के लिये तैयार हैं। सेल A1 में, स्कूल का नाम टाइप करें। फिर प्रदर्शित तरीके से सेल A3, A4 और A6 में टेक्स्ट एंटर करें। जब आप विभिन्न सेल में जाते हैं, आप देख सकते हैं कि फ़ॉर्मूला बार सक्रिय सेल की सामग्री को प्रदर्शित करता है। अब ‘रो’ 8 में शीर्षक टाइप करें। उसी ‘रो’ के अगले सेल में जाने के लिये “टैब” बटन का उपयोग किया जा सकता है। डेटा के कॉलम को दिए गए शीर्षक को कभी-कभी “लेबल” कहते हैं। यहाँ “रोल_नंबर” “नेम” आदि लेबल हैं।



1.3.8Entering Data : ‘रो’ 9 में, पहले छात्र का रोल नंबर टैप करें और “टैब” दबाकर अगले सेल पर जाएँ। छात्र का नाम टाइप करें। आप देख सकते हैं कि नाम अगले सेल तक जा रहा है। “टैब” दबाने से आप अगले सेल पर चले जाते हैं, लेकिन पिछले सेल का डेटा अभी भी नज़र आ रहा है। पहले विषय के अंकों को एंटर करें। लेकिन अब, नाम केवल आंशिक रूप से प्रदर्शित है! हम इसे शीघ्र ही ठीक करेंगे। फ़िलहाल, इस छात्र के अंकों को और अन्य छात्रों के डेटा प्रदर्शित तरीके से एंटर करें।



1.3.9Adjusting Column Width : चूँकि नाम के कॉलम में स्थित डेटा पूरी तरह से प्रदर्शित नहीं है, अतः आपको कॉलम की चौड़ाई बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिये, अपना पॉइंटर को कॉलम बी के शीर्षक की दाहिनी सीमा पर रखें। जब आपका पॉइंटर दो-मुँह वाले ऐरो के रूप में नज़र आये, तो सीमा पर डबल-क्लिक करें। कॉलम की चौड़ाई कॉलम में मौजूद कैरेक्टरों की अधिकतम चौड़ाई के अनुरूप स्वतः ही व्यवस्थित हो जायेगी। आप शीर्षक के बीच की सीमाओं को ड्रैग करके ‘रो’ की ऊँचाई अथवा कॉलम की चौड़ाई को भी बदल सकते हैं।



1.4Navigating and Editing a Worksheet : 

1.4.1Navigating a Worksheet : आप जानते हैं कि किसी सेल में जाने का सबसे आसान तरीका है उसमें क्लिक करना। और भी तरीके हैं, जिनसे आप किसी सेल में जा सकते हैं। ये विशेष रूप से तब उपयोगी होते हैं जब आपको किसी ऐसे सेल पर जाना हो जो आपकी स्क्रीन पर नज़र नहीं आ रहा हो। नेम बॉक्स में सेल एड्रेस टाइप करें और एंटर दबाएँ। आप “गो टू” बटन का उपयोग भी कर सकते हैं। इसे एफ़5 फ़ंक्शन बटन या “कंट्रोल+जी” का उपयोग करके भी प्रदर्शित कर सकते हैं। रिफरेंस बॉक्स में सेल एड्रेस टाइप करें और “ओके” पर क्लिक करें।



1.4.2keyboard shortcuts : वर्कशीट में नेविगेट करने के लिये कीबोर्ड के कुछ शॉर्टकट हैं।  

- एक स्क्रीन ऊपर या नीचे जाने के लिये “पेज आप” या “पेज डाउन” बटनों का उपयोग करें 
- वर्तमान ‘रो’ के कॉलम ‘ए’ में जाने के लिये “होम” बटन का उपयोग करें 
- वर्कशीट के आरम्भ, अर्थात सेल ए1 में जाने के लिये “कंट्रोल+होम” का उपयोग करें 
- वर्कशीट की अंतिम सेल, जिसमें डेटा मौजूद है, में जाने के लिये “कंट्रोल+एण्ड” का उपयोग करें।


1.4.3Selecting multiple cells : आप किसी वर्कशीट में अनेक सेल भी सेलेक्ट कर सकते हैं। सेल के समूह को कभी-कभी “रेन्ज ऑफ़ सेल्स” कहते हैं।  

• पूरे कॉलम को सेलेक्ट करने के लिये, कॉलम हेडिंग पर क्लिक करें। अनेक कॉलम सेलेक्ट करने के लिये, शीर्षक पर ड्रैग करें। इसी प्रकार, ‘रो’ नंबरों पर क्लिक करके ‘रो’ सेलेक्ट की जा सकती हैं। 
• क्रमिक सेल को सेलेक्ट करने के लिये, पहले सेल पर क्लिक करें, “शिफ़्ट” बटन पर क्लिक करके दबाये रखें, और अपनी पसंद के अंतिम सेल पर क्लिक करें।  अथवा, क्रम से मौजूद एक क्षेत्र को सेलेक्ट करने के लिये, सेलों के समूह पर माउस से क्लिक करके ड्रैग करें। 
• गैर-क्रमिक सेलों को सेलेक्ट करने के लिये, पहले सेल पर क्लिक करें, “कंट्रोल” बटन को दबाए रखकर अपनी पसंद के प्रत्येक अतिरिक्त सेल (या ‘रो’ या कॉलम) पर क्लिक करें। 
• पूरी वर्कशीट को सेलेक्ट करने के लिये, कॉलम ए के बाँयी ओर और ‘रो’ 1 के ऊपर स्थित छोटे बॉक्स पर क्लिक करें। अथवा “कंट्रोल+ए” का उपयोग करें।


1.4.4Using the Name Box : आप सेलेक्ट करने के लिये अनेक सेल निर्दिष्ट करने के लिये नेम बॉक्स का उपयोग भी कर सकते हैं। बराबर स्थित सेलों को सेलेक्ट करने के लिये, पहले और अंतिम सेल के सेल एड्रेस को कोलन से अलग-अलग करके एंटर करें और फिर एंटर दबाएँ। बराबर नहीं स्थित सेलों के लिये, कॉमा से अलग-अलग करके सेल एड्रेस एंटर करें।



1.4.5Editing Data : डेटा एंटर करने के बाद, आप कुछ परिवर्तन करना चाह सकते हैं। डेटा को डिलीट करने और सेल को खाली करने के लिये, उन्हें सेलेक्ट करें और “डिलीट” दबाएँ। किसी सेल की सामग्री पर कुछ और लिखने के लिये, उसके भीतर क्लिक करें और टाइप करना आरंभ कर दें। किसी सेल की सामग्री को एडिट करने के लिये, इसके अंदर डबल-क्लिक करें और अपेक्षित परिवर्तन करें। किसी एक कैरेक्टर को हटाने के लिये, आप इन्ज़र्शन पॉइंट के दाहिनी ओर स्थित कैरेक्टर के लिये “डिलीट” दबा सकते हैं, और  बाँयी ओर स्थित कैरेक्टर के लिये “बैकस्पेस”।



1.4.6Formula Bar : आप डेटा को एंटर और एडिट करने के लिये आप सीधे वर्कशीट में एडिट करने के स्थान पर फ़ॉर्मूला बार का उपयोग भी कर सकते हैं। यह विशेष रूप से तब उपयोगी होता है, जब किसी सेल में बड़ी मात्रा में सूचना उपलब्ध होती है। जब आप फ़ॉर्मूला बार में क्लिक करते हैं, तो बॉक्स के बाँयी ओर एक चेकमार्क और एक “X” आयकॉन प्रदर्शित होता है। अपना डेटा एंटर करें। अपनी एंट्री की पुष्टि करने के लिये चेकमार्क पर क्लिक करें अथवा “X” पर क्लिक करके इसे बंद करें।



1.4.7Undoing and Redoing Editing Changes : कुछ परिवर्तन करने के बाद, आप निर्णय कर सकते हैं कि उनकी कोई आवश्यकता नहीं है। आप “अनडू” कमांड का उपयोग करके अपनी पिछली क्रिया को वापस कर सकते हैं। पहले हम सेल की सामग्री को डिलीट करें। सेल पर क्लिक करें और “डिलीट” दबाएँ। अब इस क्रिया को अनडू करने के लिये क्विक ऐक्सेस टूलबार से आप “अनडू” सेलेक्ट कर सकते हैं अथवा कीबोर्ड शॉर्टकट “कंट्रोल+ज़ेड” का उपयोग कर सकते हैं। डेटा फिर से प्रदर्शित हो जाता है। आप अनडू की गयी किसी क्रिया को रीडू भी कर सकते हैं। इसके लिये, क्विक ऐक्सेस टूलबार से “रीडू” सेलेक्ट करें अथवा कीबोर्ड शॉर्टकट “कंट्रोल+वाई” का उपयोग करें। प्रदर्शित डेटा अब डिलीट हो गया है।


1.5.Working With Sheets : 

1.5.1Inserting Worksheet : आप जानते हैं कि डिफ़ॉल्ट से एक वर्कबुक में तीन वर्कशीट शामिल होती हैं। अतिरिक्त वर्कशीट इन्ज़र्ट करने के लिये, अंतिम शीट टैब के दाहिनी ओर स्थित “इन्ज़र्ट वर्कशीट” बटन पर क्लिक करें। वर्तमान में सक्रिय वर्कशीट के पहले एक नयी वर्कशीट इन्ज़र्ट करने के लिये, होम तब पर, सेल्स समूह से, “इन्ज़र्ट - इन्ज़र्ट शीट” सेलेक्ट करें, अथवा शॉर्टकट “शिफ़्ट+एफ़11” का उपयोग करें।



1.5.2Deleting Worksheet : किसी शीट को डिलीट करने के लिये, शीट टैब पर राईट क्लिक करें और “डिलीट” को सेलेक्ट करें। आप “होम” टैब के “सेल्स” समूह में “डिलीट - डिलीट शीट” कमांड का उपयोग भी कर सकते हैं। अनेक शीट को डिलीट करने के लए, “कंट्रोल” बटन को दबाए रखकर, शीट टैब पर क्लिक करके उन्हें सेलेक्ट करें। फिर राईट-क्लिक करें और “डिलीट” सेलेक्ट करें।



1.5.3Renaming Worksheet : हम वर्कबुक की प्रत्येक शीट में अलग डेटा इन्स़र्ट करने की योजना बना रहे हैं। प्रत्येक शीट में क्या है, यह जानने के लिये, यह शीट को सार्थक नाम देना सहायक सिद्ध होगा। अतः, हम शीट 1 का नाम बदलें (रीनेम करें)। इसके लिये, शीट टैब पर राईट क्लिक करें और पॉपआप मेन्यू से “रीनेम” को सेलेक्ट करें। बस नया नाम टाइप करें, जैसे, “स्टूडेंट डेटा”। आप शीट टैब पर डबल-क्लिक करके और नया नाम टाइप करके भी किसी शीट का नाम बदल सकते हैं। अब हम शीट2 का नाम बदलकर “टेबल” करें।



1.5.4Moving and Copying Worksheet : आप शीट के क्रम बदल सकते हैं। किसी शीट के टैब पर क्लिक करें और आवश्यकतानुसार बांये या दाहिनी ओर ड्रैग करें। ड्रैग करते समय, एक खाली पेज के आयकॉन के साथ काले रंग का गहरा त्रिकोण नज़र आता है। किसी शीट को कॉपी करने के लिए, शीट को ड्रैग करते समय “कंट्रोल” बटन को दबाये रखें। शीट को कॉपी करते समय पेज आयकॉन पर ए ‘+’ का चिन्ह प्रदर्शित होता है। जब आप कॉपी करते हैं, तो शीट की एक अन्य कॉपी बनती है। शीट टैब पर कोष्ठक में कॉपी की संख्या नज़र आती है।



1.5.5Moving/Copying to another Workbook : आप किसी शीट को किसी अन्य वर्कबुक में भि कॉपी या मूव कर सकते हैं। हम पहली शीट को नयी वर्कबुक में कॉपी करते हैं। शीट टैब पर राईट क्लिक करें और “मूव ऑर कॉपी” सेलेक्ट करें। “मूव ऑर कॉपी” विंडो में, “टू बुक” सूची से “(न्यू बुक)” सेलेक्ट करें। :क्रियेट अ कॉपी” चेक बॉक्स में क्लिक करें और फिर ओके पर क्लिक करें। इस वर्कशीट के साथ एक नयी वर्कबुक बन जाती है। आप उसी वर्कबुक में शीट कॉपी या मूव करने के लिये “मूव ऑर कॉपी” विंडो का उपयोग भी कर सकते हैं। शीट की स्थित को निर्दिष्ट करने के लिये “बिफ़ोर शीट” बॉक्स का उपयोग करें।


1.5.6Changing Tab Color : प्रत्येक शीट में स्टोर किये गए डेटा में अंतर दर्शाने के लिये आप शीट के टैब का रंग बदल सकते हैं। इसके लिये, किसी शीट टैब पर राईट-क्लिक करें और “टैब कलर” को सेलेक्ट करें। प्रदर्शित पैलेट से एक रंग चुनें। रंगीन टैब को स्पष्ट रूप से देखने के लिये एक अन्य शीट टैब पर क्लिक करें।



1.5.7Other Sheet Options : जब आप किसी शीट टैब पर राईट क्लिक करते हैं, तो कुछ अन्य विकल्प प्रदर्शित होते हैं। “इन्स़र्ट” विंडो प्रदर्शित करने के लिये “इन्स़र्ट” सेलेक्ट करें। यहाँ आप सेलेक्ट कर सकते हैं कि आप एक वर्कशीट इन्स़र्ट करना चाहते हैं, चार्ट या कुछ और। सभी शीट को सेलेक्ट करने के लिये, एक शीट टैब पर राईट क्लिक करें और “सेलेक्ट ऑल शीट” विकल्प को सेलेक्ट करें। शीट डीसेलेक्ट करने के लिये, एक शीट टैब पर राईट क्लिक करें और “अनग्रुप शीट्स” को सेलेक्ट करें।



1.6The File Tab : 

1.6.1The File Tab : एक्सेल के पिछले वर्ज़न में, ऑफ़िस बटन स्क्रीन के शीर्ष पर बाँए सिरे पर स्थित था। एक्सेल 2010 में, इसके स्थान पर रिबन में “फ़ाइल” टैब शामिल कर लिया गया है। फ़ाइल टैब पर क्लिक करने से “फ़ाइल” मेन्यू प्रदर्शित होता है, जिसे “बैकस्टेज व्यू” भी कहते हैं। ऑफ़िस बैकस्टेज में सभी “आउट” फ़ीचर शामिल होते हैं, अर्थात, वह फ़ीचर जो वर्कबुक के किसी विशिष्ट बिंदु पर कार्य नहीं करता, और जिसके प्रभाव वर्कशीट पर नज़र नहीं आते। इसमें फ़ाइल को खोलने, बंद करने, प्रिंट करने और विभिन्न फॉर्मेट में सेव करने के सामान्य विकल्प शामिल होते हैं। अनुमति सेट करने जैसे विकल्प और डॉक्यूमेंट की वे प्रॉपर्टीज़ जो आपको वर्कबुक बदलने की अनुमति नहीं देती, किन्तु आपको अनेक प्रकार से उपयोग करने की सुविधा देती हैं, बैकस्टेज व्यू में उपलब्ध होती हैं। डॉक्यूमेंट की प्रापर्टीज़ देखने के लिये, बांये पैन में स्थित “इन्फ़ो” पर क्लिक करें। आप अपने वर्कबुक से संबंधित सूचनाओं, जैसे साइज़, बनाने और संशोधन करने की तारीख, ऑथर आदि को दाहिने पैन में देख सकते हैं।



1.6.2Saving a Workbook : अपनी वर्कबुक को नियमित अंतराल पर सेव करते रहना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इससे बिजली चली जाने पर या किसी अन्य अप्रत्याशित कारण से डेटा को सुरक्षित रखा जा सकता है। एक सामान्य एक्सेल वर्कबुक एक्सटेंशन “.एक्सएलएसएक्स” (.xlsx) के साथ सेव होती है।

वर्कबुक को सेव करने के तीन तरीके हैं।  
1. फ़ाइल टैब पर क्लिक करें और “सेव” को सेलेक्ट करें।  
2. क्विक ऐक्सेस टूलबार पर “सेव” आयकॉन पर क्लिक करें।  
3. शॉर्टकट बटन “कंट्रोल+एस” का उपयोग करें। यह सबसे सुविधाजनक विकल्प है।


1.6.3Saving a New Workbook : जब आप किसी नयी वर्कबुक को पहली बार सेव करते हैं, तो “सेव ऐज़” विन्हो प्रदर्शित होती है। फ़ाइल के लिये नाम, फ़ोल्डर और स्थान निर्दिष्ट करें और फिर “सेव” पर क्लिक करें। डॉक्यूमेंट विंडो के शीर्ष पर स्थित टायटिल बार पर नाम नज़र आता है। आप “फ़ाइल टैब  सेव ऐज़” विकल्प का उपयोग करके किसी पहले से मौजूद फ़ाइल को भी एक नए नाम से सेव कर सकते हैं।

1.6.4Saving to a New Folder : आप कोई फ़ाइल सेव करते समय एक नया फ़ोल्डर बना सकते हैं। 

ऐसा करने के लिये निम्नलिखित चरणों का अनुसरण करें - 
1. फ़ाइल टैब पर क्लिक करें और “सेव ऐज़” को सेलेक्ट करें।  
2. प्रदर्शित विंडो में, जहाँ आप नए फ़ोल्डर को रखना चाहते हैं, उस उपयुक्त स्थान के लिये नेविगेट करें। 
3. “न्यू फ़ोल्डर” बटन पर क्लिक करें।


1.6.5Create A New Folder : सक्रिय डायरेक्टरी में एकक सब-फ़ोल्डर के रूप में नया फ़ोल्डर बन जाता है। “न्यू फ़ोल्डर” बॉक्स में नए फ़ोल्डर का नाम टाइप करें और “एंटर” दबाएँ। नए फ़ोल्डर को खोलने के लिये “ओपन” पर क्लिक करें। इस फ़ोल्डर में उसी नाम से अपनी फ़ाइल को सेव करने के लिये “सेव” दबाएँ। यदि आप अपनी फ़ाइल का नाम बदलना चाहते हैं, तो “फ़ाइल नेम” बॉक्स में उपयुक्त परिवर्तन करें और फिर “सेव” पर क्लिक करें। अब आपकी वर्कबुक नए बनाये गए फ़ोल्डर में सेव हो गयी है।



1.6.6Closing a Workbook : किसी वर्कबुक को बंद करने के लिये, फ़ाइल टैब पर क्लिक करें और “क्लोज़” को सेलेक्ट करें अथवा कीबोर्ड शॉर्टकट “कंट्रोल+डब्लू” का उपयोग करें। अथवा, आप विंडो के शीर्ष पर दाहिने सिरे पर स्थित “X” आकार के आयकॉन पर क्लिक कर सकते हैं। यदि आप बिना सेव की गयी फ़ाइल को बंद करने का प्रयास करते हैं, तो एक्सेल इसे बंद करने से पहले पूछता है कि क्या आप इस फ़ाइल को सेव करना चाहते हैं। अपने काम को सेव करने के लिये प्रदर्शित डायलॉग बॉक्स में “सेव” बटन पर क्लिक करें। जब आप अपनी वर्कबुक को बंद करते हैं, तो यदि अन्य वर्कबुक खुली होंगी तो एक्सेल एप्लीकेशन चलती रहेगी। सभी वर्कबुक को बंद करके एक्सेल एप्लीकेशन से बाहर आने के लिये फ़ाइल टैब पर “एक्ज़िट” विकल्प का उपयोग करें।



1.6.7Opening a Workbook : वर्कबुक को खोलने का सबसे सरल तरीका है, इसके आयकॉन पर क्लिक करना। इससे माइक्रोसॉफ़्ट एक्सेल एप्लीकेशन आरंभ होती है और फ़ाइल खुलती है। ऐसे अनेक तरीके हैं, जिनसे आप पहले से खुली हुई एक्सेल एप्लीकेशन में एक वर्कबुक को खोल सकते हैं। आप शयूर्टकट बटन “कंट्रोल+ओ” का उपयोग कर सकते हैं, अथवा “फ़ाइल” टैब पर क्लिक करके “ओपन” को सेलेक्ट करें। “ओपन” विंडो में, अपनी वर्कबुक की लोकेशन तक नेविगेट करें; फ़ाइल को सेलेक्ट करें और “ओपन” पर क्लिक करें।



1.6.8Open a Recently Used Workbook : हाल ही में खोली गयी वर्कबुक को खोलने के लिये, आप “फ़ाइल” टैब पर क्लिक करके और फिर “रीसेंट” पर क्लिक कर सकते हैं। अब सेन्ट्रल पैन में “रीसेंट वर्कबुक” की सूची से वर्कबुक के नाम पर क्लिक करें। आप “रीसेंट प्लेसेज़” सूची में से हाल ही में उपयोग किये गए किसी भी फ़ोल्डर से किसी वर्कबुक को ऐक्सेस कर सकते हैं। इसके लिये, फ़ोल्डर के एक नाम पर क्लिक करें और “ओपन” विंडो में अपेक्षित वर्कबुक के लिये नेविगेट करें और “ओपन” पर क्लिक करें। एक्सेल टास्कबार बटन पर क्लिक करने से एक जंप-लिस्ट प्रदर्शित होती है, जिसमें हाल ही में उपयोग की गयी वर्कबुक प्रदर्शित होती हैं। आप इस सूची में से किसी एक पर क्लिक करके वह वर्कबुक खोल सकते हैं।



1.6.9Printing a workbook : किस वर्कबुक में, आरंभ में, सक्रिय वर्कशीट ही नज़र आती है। आप “कंट्रोल” बटन को दबाए रखकर और विभिन्न शीट टैब पर क्लिक करते हुए अनेक शीट को सक्रिय बना सकते हैं। अपनी वर्कबुक को प्रिंट करने के लिए, “फ़ाइल” टैब पर क्लिक करें और बांये पैन से “प्रिंट” को सेलेक्ट करें। आप शॉर्टकट बटन “कंट्रोल+पी” का उपयोग भी कर सकते हैं। “प्रिंट” इंटरफ़ेस प्रदर्शित होता है। दाहिने पैन में, आप पहले सक्रिय पैन का प्रीव्यू देख सकते हैं।



1.6.10Specifying Settings -सेटिंग्स निर्दिष्ट करना : सेन्ट्रल पैन में, शीर्ष पर अपेक्षित कॉपियों की संख्या निर्दिष्ट करें। अन्य डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स प्रदर्शित होती हैं। आपको उनमें से कुछ को बदलने की आवश्यकता हो सकती है। प्रदर्शित दृश्य से आपको इसमें सहायता मिलेगी। 

प्रिंटर : आप कौन से प्रिंटर का उपयोग कर सकते हैं। आप फ़ाइल में भी प्रनत कर सकते हैं। 
प्रिंट ऐक्टिव शीट : आप क्या प्रिंट करते हैं – ऐक्टिव शीट्स, पूरी वर्कबुक, पेजों की रेन्ज, अथवा, यदि डेटा सेलेक्ट किया हुआ हो तो सेलेक्शन।  
प्रिंट वन साइडेड : क्या आप एक तरफ़ प्रिंट करते हैं,या ड्यूप्लेक्स(दोनों तरफ़) 
कोलेटेड : क्या शीट्स को क्रम से प्रिंट करना है, अथवा नहीं। 
पोर्ट्रेट ओरिएंटेशन : डॉक्यूमेंट का ओरिएंटेशन। 
साइज़ : पेपर का साइज़। 
मार्जिन : पहले से निर्धारित मार्जिन, अथवा कस्टम मार्जिन। 
शीट साइज़ : क्या वर्कशीट को इसके मूल आकार में प्रिंट करना है; एक अलग पेपर साइज़ का उपयोग करना है, अथवा इसे विभिन्न तरीके से छोटा करना है।


1.6.11Other Settings : आप सेलेक्ट किये गए प्रिंटर से संबंधित सेटिंग्स को निर्दिष्ट करने के लिये “प्रिंटर प्रॉपर्टीज़” लिंक का उपयोग कर सकते हैं। अन्य बारीक सेटिंग्स को निर्दिष्ट करने के लिये “पेज सेटअप” का उपयोग करें। अंत में, प्रिंटिंग आरंभ करने के लिये, “प्रिंट” बटन पर क्लिक करें।   

                             

Saturday, 20 October 2018

website ki bad backlinks kaise remove krte h -

hello friends ,

kaise ho sb log umeed krta hu ki sb log ache hi honge.pehle to dosto m aapse sorry bolna chata hu ki maine 3-4 roj se koi bhi article update nhi kiya.kyunki dosto m kuch personal kaam me busy tha .to m aapke liye koi latest update nhi la ska.

isliye dosto m aaj aapke liye ek new post lekr aaya hu ki Bad backlinks kya hote h or hum inko apne blog se remove kaise kre.dosto humne apni pichli post m apne blog per templete ko change kaise kre or upload kaise kre is bare m baat ki thi ager apne humari us post ko nhi pdha h to m uska link niche de dunga aap usper click krke use padh skte h or apne blog ko acha bna skte h .



dosto hum jaante h ki backlinks kissi bhi website k liye bahut jaruri hoti h lekin dosto back links 2 types ki hoti h ek to baclinks jo humri website ko google k search engine m rankko badati h lekin badlink humri website ko google k search engine me rank ko down krti h to dosto aaj hum isi topic per baat krenge ?

dosto aaj kl hr bnda apni website ya blog ko google me first page me rank krwana chata h kyunki jb unki website google k first page pe show kregi to unke visitors badhenge to iske liye aap bahut mehanat krte ho acha contebt likte ho ,backlinks bnate ho.seo krte ho .

to dosto isik liye kuch friends anjane me backlink bna lete h ya phir kisi or ne unkiwebsite per backlinks bna di jisse  unki website achi tarh se rank nhi krti or unko is bare m kuch bhi pta nhi hota h.to hum isme back links kya h or isko kaise pachane or remove kaise kre is bare me detail se baate krenge…..


Bad backlinks kya h?



dosto bad backlinks un links ko kha jata h jo humri website ya blog k liye harm ful hoti h.or in dangerous link ki wajh se humari website k ranking down ho jati h ye bad baclinks aisi website se bne hote h jinka humari website se ya website k article se dur dur tuk koi samaband nhi hota h.

ager in abd baclinks ko  adhik time se remove nhi krte h to google humari website ko search engine se delete kr skta h jisse humari website ya bvlog k visitors aana band ho jaayenge.


Types of Bad backlinks sites:


links from the 404 error page.
links from adult website.
link exchange{in some case}
links from automated tools
links from low quality sites

bad backlinks k nukasan-

bad backlink ka sbse bada nuksaan ye h ki  isse humari website ki search ranking down ho jati h or humari site k url bhi  search result se drop ho jate h.


1-Search engine traffic:

dosto humne piche btaya tha ki bad backlinks humari website ki authority ko km kr deta h.jiski wjh se search engine ranking girne lgti g or traffic km aata h.


2-unrealeted traffic:

in websites se aana wala traffic humari website k liye bahut dangerous hoti h kyunki inki wjh se humari website per unrelated traffic aata h jinka humare website se koi link nhi hota h.jo humari website ka dwel time kharab krti h .


3-google penalty:-

dosto ager humari website per jyda badbacklinks hote h to google humari website ko penalty k taur per black list bhi kr skta h .


Find bad backlinks:

dosto  ab baat ye aati h ki hum apne blog ya website per in bad backlinks ka knha se or kaise pta kre ….

1-apne google webmaster account ko open kre.

2-search traffic per click kre.

3-links to your site per click kre.

4-ab aapke saamne aapki sites ko add krne wali sabhi sites ki link hongi ab sabhi k liye more per click kre.

below the image


5- ab download this table per click kre.

6- ab aapke paas link ki list aayegi ise notepad me open kre.

7-ab aapke saamne apke sare back links show ho jaayenge.aap sample or latest link bhi download kr skte h.


dosto ab aapke saamne sbhi backlinks ki list open ho gyi h jo aapki website se link k ab hume inme se bad back links ka pta krna h or unhe remove krna h to continue reading...………….

dosto back links ki list me se bad backlinks ko search krne k liye aap ahrefs, SEMrush link audit tool ka use kr skte h ya aap all links ka review krke manually pta kr skte h.

Back links ko remove kaise kre:

dosto ab hum bat krenge ki bad backlinks ko remove kaise kre jisse humar website ki search ranking bni rhe or visitior aate rhe iske liye dosto humare pass 2 tarike h .

ek to dosto hum website k owner se contact kre or us bad backlinks ko htane ke liye baat kre.dusra option ye h ki dosto hum back links ko disavow kre taki google unko site ki ranking me count na kre


1- contact website owner-

dosto back links ko htaane liye humare back links ki list me se unhe ek ek krke open krke unke owner kko email krna hoga or unse request krni hogi ki wo apne backlinks ko humari website se hta le or uske bad aapko kuch dino ka wait krna hoga or ab aapki website se jo badbacklink remove ho gye h unhe list me se  hta de or ab bche hue links per disavow tools ka use krna h.


2- use google disavow tool:

sbse Pehle aap apni bad backlinks ki text file bna kr tayar kr le unhe google disavow tools me submit krna h.


google disavow tool se bad backlinks ko remove kaise kre?

1- sabse Pehle google disavow tools ko open kre.

2-ab aapko apni website ko select krna h jiske backlinks aap remove krna chate h.

3-or uske baad disavow links per click krna h.


4-ab aapko apni backlinks ki text file ko select krna h jo aapne bnaai h.

5-uske baad select krke submit per click kre or done per click kre.

see the below image


ab aapke sare badback links ko disavow kr diya h ab unka aapki website ki search ranking per koi effect nhi hoga.

to dosto aaj ki humari ye post aapko kaisi lgi ager achi lgi  h to aap isko apne dosto k saath share jaur kre or humare blog ko subscribe jarur kr le taaki aapko achi achi post mil ske.or aapka koi bhi question ho to aap mujhe comment box me comment krke puch skte h .

Monday, 15 October 2018

blogger blog ki templetes ko change,upload kaise kre

hello friends,

m hu aapka dost or aaj aapke liye lekr aaya hu ek new post jo ki humare blog k liye or blog per traffic badhane k liye bahut jaruri h.to dosto aaj hum is post me baat krne wale h ki hum humare blogger k blog ka templete ko chane ,or upload kaise kre.

umid krta hu dosto aapko humari pichli post pasand aayi hogi .dosto aasa krta hu ki ye post bhi aapko bahut apsand aayegi.

isi k saath hum apne post pe aate h .dosto hum log bdi mehnat se apna blog bnaate h or use jyda mehnat hum us per aarticle likhne me krte h taki humare blog per viewers bdhe traffic aaye log jyda se jyda humare blog k saath jude.to dosto humare blog me hume article k saath saath acha templete bhi lgana  pdta h .

to dosto jub tuk humara blog acha nhi dikhega tb tuk koi bhi visitors humare blog per jyda der tuk nhi rukega or wapas humare blog per nhi aayega .to dosto ye post aapke liye bahut hi useful hone wali h to aap ise pdhe ho follow kre.








dosto blog ka templete chane kaise kre is bare me btane se Pehle hum blog ka templete change kyu kre,ye janna humare liye bahut hi jaruri h.to dosto hum is bare m bat krenge-

blog ki templete ko change kyu kre:?

dosto ager aap log bhi apne blog ko bdhane chate h or apne blog per traffic lana chate h to aap uski templte ko change kre or usko acha look de jo viditor ko avha lge or aap apne blog pe social media button bhi add kr skte h ager aapko social media button add krna nhi aata h to niche diye link per click krke jan skte h.

http://www.dostihelp.co.in/2018/10/blog-me-social-share-button-kaise-add.html

dosto blog me hume Pehle se hi bahut se templete free me milte h aap apne blog per unme se bhi koi templete lga skte h but dosto aapko apne blog ko best bnana h to aapko aopne blog k liye achi templete download krni hogi wo bhi free website se dosto templetes ko download kerne k liye bahut si website h lekin m aapko 2 best website k bare me bta rha hu kyunki m bhi apne blog k liye templetes inhi website se lgata hu.

ye 2 website h-

1-https://btemplates.com/

2-https://www.hugedomains.com/domain_profile.cfm?d=webdesignrazzi&e=com

in dono sites per jaker aap apne blog k liye jo aapko achi lge wo templetes choose ker skte h lekin dosto yad rkhne wali bat ye h ki aap apne blog k liye XML file hi choose kre.kyunki dosto blogger XML file hi support krta h.


blog templete ka design kaisa hona chaaiye:?

blog k liye templete download krne se Pehle hume ye pta hona chaaiye ki humare blog k liye templete kaisa hona chaaiye.

1-seo friendly- dosto ye bahut hi jaruri h ki aapka templete seo friendly hona chaaiye jisse ki wo search engine me aasani se search kr ske.

2-mobile friendly-aapko hamesha ye bhi dhyan rkna hoga ki aapki templete mobile friendly honi chaaiye jisse ki aapka blog mobile me acha dikhe .kynki jydatar log mobiles me hi internet use krte h.

3-fast loading-dosto aapko apne blog k liye templete aisi choose krni chaaiye jo jldi hi open  ho jaaye kyunki ager koi visitor aapke blog per aata h or aapka blog dhire dhire se open hoga to visitor wnha nhi rikega to aap apne blog k liye fast loading wali templete hi choose kre.


blog ki templete change or upload kaise kre?

dosto sbse Pehle aap BLOGGER.COM site per jaaye oe apna blog account login kre or uske dashboard pr jaaye.

1-uske bad aapko side bar me "templete" button per click kre.

image ko follow kre--


1-uske bad aapko upper corner me backup restore ka button milega wnha usper click kre.

 image ko follow kre---


1-download full templete per click kre or apni purani templete ka backup le kyunki jb hum new templete ko upload krte h to kai bar error aa jati h to erroe aane per hum apni purni templete ko upload kr skte h.

2-choose file-ab aap choose file per click kre or apne apne blog k liye jo templete download kiya h wnha jaker select kre

3- apne blog ki templete ko select krne k baad upload per click kre or thori der wait kre uske baad apke blog ki templete change ho jaayegi or aapka templete ka look change ho jaayega.

to dosto ye thi aaj ki humari post aasha krta hu ki aaapko ye post jarur pasand aayi hogi ager koi question ho to aap comment box me comment krke puch skte h.

thnx for reading my  post...……………...


Saturday, 13 October 2018

blog me social share button kaise add kare

hello friends,

m hu aapka  dost or aaj apke liye lekr aaya hun ek achi or useful post .dosto humne humari pichli post me humari blog ya website ko complete kr liya tha or post kaise like ye bhi btaya tha.to dosto aaj hum baat krne wale h ki hum apni website ya blog per social media floating button kaise lgaaye or jisse hum ya koi bhi visitor humari post ko share krna chahe to social media button k jariye share kr skte h.


blooger site me social media button ko kaise add kre:-

to dosto aaj hum apne blogger ki website per social media button add kaise kre.dosto aap logo n bahut se blog or website per social media button dekhe honge or apko bhi lga hoga ki m bhi apni website ya blog per social media button lgau.lekin kaise to dosto hum aaj isiliye ye post lekr aaye h 

jisse aap sb log jinhone apne blog ya website per social media button add nhi kiya h wo is post ko step by step follow krke use kr skte h.

acyually friends wordpress wali website per social media button lgane k liye bahut si plugin  hoti h jisse unhe click krke hum website per social media button lga skte h.

but dosto blogger ki website k liye aisa koi plugin nhi jisse ek click krke hum social media button ko apne blog website per lga ske.lekin dosto isme ghbarane ki koi baat nhi h hum aapko iska ek simple tarika btaynge yani ki ek aisi website ke bare me btanunga jiska use krke aaap bhi apne blog per floating share button lha skte h.


blog me social media butto add:-

dosto ab hum aapko social media button website per kaise lgaaye iske bare easy tarike se step by step btaayenge to aap isko jatrur follow kre-

1-sabse Pehle aap apne browser me official website SUMO.COM type kre. or wnha per sign up kre or apna account create krle.

blog me social media share button kaise lgaaye

friends ab aap log apni website ka URL LINK, .email address or passward type kre is trh aap apna account create kr skte h ab aap account me login ho jaayenge.

2-ab aap apne blog ko open kijiye or themes per click kre or wnha HTML TAG per click kre ab aapke saamne coding language hogi aapko usme kuch bhi nhi krna h aap uske coner me jaker click kre or CTRL+F type kre ab aapke saamne ek search box open hoga usme aapko <body> likh ker search krna h  ab jnha bhi body word hoga wnha highlight ho jaayega.

3-ab aapko apne sumo.com account me jana h wnha aapko apni website ka url add krna h url add krte hi aapko wnha ek code generate hoga use code ko aapko copy krna h 

     see the bellow image-


4-or apne blog me jnha aapne <body> tag search kiya tha  thik uske niche lejaker paste krna h ctrl +v k saath .see the below image-

.

ab aapki website per social share button add ho gya h or aapko is website me kuch extra featurs milte h jisse aap pta kr skte ho ki aapki post ko kitni bar social nedia per share kiya gya h .aap iske liye google analytic account se link krke pta kr skte h.

to dosto ye thi aaj ki humari post umid krta hu dosto aapko humari ye post bahut pasand aayegi ager koi questions ho to dosto aap commentbox me commen t krke puch skte h  dosto ager ye post pasand aaye to isko share aur humare humari website ko subscribe jarur kre jisse humari post ka notification aapki email id per mil ske.

thnx friends for read this post...……………………………………………………………………………………………………….

Thursday, 11 October 2018

google adsense account approve kaise kraaye

hello friends,

friends sb log kaise ho ,umid krta hu ki sab log ache hi honge.to friends humne humari pichli post me jana tha ki  google adsense jin logo ka approve h wo log apne account me ads create kaise kre or apne blog ya website per kaise lgaaye .ager aap logo ne abhi tuk wo post nhi padhi h to aap niche diye hue link per click ker skte h .


                   http://www.dostihelp.co.in/2018/10/how-to-create-ads-in-adsense.html

to dosto jin dosto ka google adsense account approve nhi h un logo k liye aaj m ye post leke aaya hu.umid krta hun ki aap ise follow krne k baad bahut benefit hoga to dosto hum is post me aapko google adsense approve krane k bare me step by step btaayenge.to dosto is post ko dhya se padhe or step by step follow kre.

google adsense account approve krane me kafi time lagta h wo bhi new blogger ko ya jinhone new website ya blop create kiya h .kynki dosti jin logo ne new blog start kiya h wo log 2se 3 post likhte hi google adsense k liye apply kr deta h or google ki terms and condition ko follow nhi krte h isliye unlogo ka account disapprove ho jata h.to dosto aap google adsennse k liye apply kb kre in bato ko hum step by step samjhenge.

continue reading...………..

www.dostihelp.co.in

to dosto ager aap apne google adsense account ko approve krana chate  h to aapko kuch bato ka dhyan rkhna hoga jo hum apko basic se samjhyenge.or aapko inko follow kerne k baad google adsense k liye apply krnege to aapka aacount jarur approve hoga.


google adsense account approve krane ke liye 7 bate-

1-website ya blog 2-3 weeks purana ho-:

 to friends aapko sabse pehli baat ye dhyan me rkni hogi ki aapka blog ya website 2 se 3 hfte purana hona chaaiye .kuch log aise h jo website bnaate hi use per 1-2 post 1  din me likh deta h or adsense k liye apply kr dete h or unka account disapproved ho jata h to dosto aaplogo ko aisa nhi krna h.

2-aapke blog ya website per 10 se adhik article ho-:

dosto dusri baat ye h ki aapke bloh ya website per km se km 10 uniq article hone chaaiye.or km se km 500-1000 word k hone chaaiye matlab lenthy hone chhaiye.

3-age 18+ honi chaaiye:-

dosto 3rd baat ye h ki ager google adsense account bna rhe h to aapki age 18 ya 18+ jarur honi chaaiye kyunki ager aapki age 18 nhi h to google aapka account approve nhi krega.isliye friends ager aapki age 18 nhi h to pershan mt hoiye kyunki ager aapki ager 18 nhi h to aap apni family mrmber k name se bhi account bna skte h.jinki umer 18 /18+ ho.

4-copyright content nhi hona chaaiye:-

 friends google adsense copyright content per ads approval nhi krta matlb aapne kisi dusri site se  content copy kiya or apne blog ya website per paste kr diya to aapka adsense account approve nhi hoga .isliye kisi ka content copy na kre or jo bhi articles h wo khud likhe.

5-compulsory pages jarur hone chaaiye:-

 dosto aapki website ya blog per adsense account approve krna chate h to aap apne blog ya website per kuch jaruri pages h wo jarur create kre

or inme anke hisab se apne bare m apni website k bare me jarur likhe ,khali na chore.

about us    ,contact us        privacy policy  etc.

6-traffic:-

friends most important baat ye h ki aaapki website per acha kasha traffic hona chaaiye ager aapke blog ya website aper traffic nhi h to aapka adsense account approve nhi hoga. isliye aap aisa content likhe jisse aapki website per traffic aaye. kyunki bina traffic k aapka account approve nhi hoga.

7-adsense supported content hona chaaiye:-

friends aapke blog ya website per unsupported content yani article h to aapka account approve nhi hoga matlab pornography,adult and mature jaisa nhi hona chaaiye.

to dosto ye thi 7 bate jine apni website ya blog me follow krke adsense account ko approve kra skte h.

dosto aapko humari ye post aaapko kaisi lgi iske bare m hume jarur btaaye.ager koi question ho to comment box me comment krke jarur btaaye.

Sunday, 7 October 2018

how to create ads in adsense

hello friends,

aap sb kaise ho ,m aapka dost aapke liye aaj ek new post lekr aaya hu jo h ki hum humare adsense account me add kaise create kre or usko blog or website per knha or kaise lgaaye.

to friends hum iske bare detail se baat krenge wo bhi step by step to friends to friends humne apni pichli post me apni blog ya website ko googhle adsense me add kaise kre ye  btaya tha umod krta hu dosto aapko meri ye post bahut pasand aayi hogi ager aapme se kuch logo ne wo post nhi dekhi h to humare blog per jaker ya niche link per click krke padh skte h

  http://www.dostihelp.co.in/2018/10/google-console.html


1-adsense me ads kaise create kre:-

1-sbse Pehle aap apne adsense account me login kre ager aapka adsense account approve hua ho to or     login hone k baad "my ads" button per click kre.

2-"new add units" per click kre. 

                      follow this below image



www.dostihelp.co.in

3-ab aapke samne new window open hogi usme detail fill kre.

   1-name-apne ad ka jo bhi name dena chae de skte h.

.  2-ads size-default rhne de ya apni requrment k hisab se change kr skte h.

   3-ads type-default rhne deya apne hisab se change kr skte h.

   4-text and style- default rhne de.

               follow the below image

3-save and get code per click kre-

      see the below image

4-ab aapke samne new window open hogi .

5-or usme ads k code honge jinhe aap copy kre or

6-close per click kre.

see the below image

2-adsense k code ko apne blog ya website me knha or kaise lgaaye:-

1-to friends aapko sabse Pehle apni post ko complete likhna h jaise aap  post likhte ho likhne k baad ap use save krke dobara edit kro or HTML per click kro



2-ab aapke samne aapki sari post HTML code me ho jaayegi or wnha per "<br/> ko dekh ker thik uske niche is code ko jisko humne copy kiya tha ctrl+v k saath paste kr de 

follow the below image-



to friends ye tha aaj ka humara topic ki adsense k ads ko create kaise kre or website ya blog me knha or kaise lgaaye.to umid krta hu ki dosto humari ye post aako bahut pasand aayegi or aapke liye bahut faydemnd rhegi.dosto koi post se related koi problem ho to comment box me comment krke jarur btaaye.

thnx for watching my website    ----www.dostihelp.co.in

Thursday, 4 October 2018

bhajan


                                                          दों हा
                           मंगलचन्द जयदेवा माली भजन बनाकर गावह \
                         गांव मंडावा मान बस माली मनव की छाप लगावह \\
   
                   *       *         *       *          *          *           *             *        *
                        सुरसत मात शारदा सुमरु ,गजानन्द को ध्यावह /
                         गिरधाननद गुरू क सरण सुब को शीश  नवा व  ह   //
                  *       *           *       *          *           *           *           *          *
    जयदेव जी क भजना की शोक लगी सन १९४५ सो मैंने खूब भजन सीखा और गाया /
    हर जगह जठे भी सतसंग होतो बठे ही चल्यो जातो /रात भर भजना माही रहतो /मेरे  पिताजी बहुत खुश रहते और माताजी दूध गर्म करके पिलाती और कहती बेटा रोजाना मत जाया कर ,मेरे इतनी शोक हो गयी सो श्री कालूराम जी पुरोहित जी को अपना गुरु बनाया और उनकी कृपा से गाता रहा /फिर १९७६ में भजन बनाने की शोक लग गयी तो खूब भजन लिखे बाद में १९८७ में श्री गिरधानन्द स्वामी जी को गुरु बनाया लक्ष्मणगढ़ में उनका स्थान ह /अब गुरुओ की क़ृपा से चल रहा हु //

                                                     भजन १
 टैर     ------भाईडो गजानंद न धयालो र बीती जाय बहार
   १ -गणपति हो तुम सुख के देवा नित उठ करू तुम्हारी सेवा //
       मोदक लाडू चड़ाउ तेरे मेवा , मेरा करदो बेडा पार //
        गजा .... .........
   २ -निराकार से शक्ति चाली ब्रह्मा के घर बाजी टाली /
       ब्रह्मा ;बोल्या सुन मतवाली  शंकर के इकतार  //
       गजा .......
.
   ३ -शंकर से या शक्ति बोली भोलेनाथ पलक झट खोली  /
        फूल बराबर पृथ्वी तोली रच दिया संसार //
         गजा. ........
    ४ -पार्वती है भोली भाली  कर विनती मनवो माली /
         अब तो सुनले विनती महारी  एक पुरुष की नार //
          गजा........

दोहा : गजानंद और शारदा तो सुमरु गुरु महाराज /
           भरी सभा के मायन,तो रखियो मेरी लाज //
दोहा :  संत द्वार श्याम जी तो भगत द्वार राम /
            हनुमत कारज सारसी तो पूरण होसी काम //

blog website ko google console se add kaise kre

hello friends,

m aapka dost aapke liye aaj newpost leke aaya hun ki hum apne blog website ko google console me add kyun kre or kaise kre or iske kya faaayde h,




1-blog website ko google console me add kyun krteh:

-blog or post ki link google search console me add ho jati h jisse traffic badhta h yani visitors aate h.

-blog website k visitor ki puri jankari mil jati h.ki log konse word ko jyda search kr rhe h or visitor        knha se aate h or konse page ko ya post ko jyda pasand krte h

-ager humari post google search me nhi aa rhi h to uski error report dekhne ko milti h

-hum apne blog ya website ka sitemap bhi add kr skte h .

-apni koi post jo hime visitors ko nhi show krna chaate wo block ker skte h

-blog ya website ki security k bare m jankari deta h

to friends in sub k liye hume apne blog ko google console me add krna chaaiye.


2-blog ya website ko googhle console me add kaise kre:

1-sbse ehle aap apne web browser me google console search kre or apni gmail id se login kre.login krne k liye is link per click kre.https://www.google.com/webmasters/tools


2-apni blog property ko add kre.yani apni website ka url dale.aur add property per click kre



.

                                                                                                                                      3-add property per click kre k baad aapke pass ek new window open hogi.  

                                            

     ab aapko ynha se ek code lena h apni properety ke code lene k 3 tarike h -

1-sabse Pehle "alternative methods "likha h use per click kre.

2-ab jo option khulega usme HTML TAG select kre.

3-ab jo code dikhega use copy kre.

ab aapka ye setup pura hua lekin is page ko open hi rhne dena h 

4-ab aapne jo code copy kiye h use apni blog ya website me add krna h


1- ab apne blog me aaye .  

2-theme per click kre.

3-uske baad html tag per click kre.

4-ab aapke saamne website html code m diukhai degi

5-ab aap box me click kre or ctrl+f       press kre to aapke saamne ek search box khulega

6-usme aapko <head type krna h or search krna h to ab aap jnha per head tag hoga wnha highlight hoga 

7-ab aap us code ko us head tag k niche paste ker de or save theme per click ker de.

5-ab aap phir se google console page me aa jaaye jnha se code copy kiye theor wnha niche verify per click kre.ab aapka website ya blog verify ho gya h ab aap dashboard per aajaye or wnha aapki website ya blog ka naam dikhega

to dosto humne aaj google console k bare me step by step jana umid krta hu ki aapko samjh me aaya hoga.ager koi question ho to comment box me comment krke jarur btaaye.